शनिवार, 27 जून 2020

वाह रे नेता (कविता)



वाह रे नेता।

वाह रे नेता
पहले थाली बजवाये
फिर मोमबत्ती जलवाए
ताली भी बजवाये
पर फिर भी कोरोना न भगा पाये
मजदूरों को बहलाये
मजदूरों को फुसलाये
मजदूरों पे डंडे बरसाए
पर कोरोना को न भगा पाये
पैदल चलता मजदूर सड़क पे ही मर जाये
पर नेता जी टीवी पर देवता बन कर आये
राशन देने के बहाने
घर पहुचाने के बहाने 
घर घर नेता प्रचार करवाये
पर कोरोना न भगा पाये
अब न जाने खुद की रोटी 
सेकने के लिए नेताजी कितने पकवान बनाये
पर कोरोना न भगा पाये
नेता है ये सब नेता है
जरूरत पड़ा तो मजदूर क्या है 
खुद का देश बेच के खा जाए।
@tri....

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