क्या प्यार इसी को कहते है......
प्यार यदि सचमुच प्यार ही है तो समय बीतने के साथ उसका रंग गहराता ही है, धूमिल नहीं होता। लंबे समय तक साथ रहने के बाद एक-दूसरे को देखा नहीं जाता बल्कि अनुभूत किया जाता है, ह्रदय की अनंत गहराइयों में......
दो बुजुर्ग मिया बीबी मुम्बई सहर में काफी सालो से एक साथ रहते थे।मिया की उम्र 62 और बीबी की उम्र 51 के करीब होगी। उनके बीच लगाव इतना था कि बस एक दूसरे के लिए सब कुछ थे।
कई साल से लड़ते झगड़ते ,बात न करने को कहते पर बात किये बिना रह भी नही पाते।
दोनों की बातों में एक दूसरे के लिए प्यार था समर्पण था।
जब कोई उनसे एक दूसरे के बारे में पूछता तो दोनों की बाते गहरे प्यार को प्रकट करती। दोनों एक दूसरे की खूबियों को बताते।
कुछ इस तरह 62 वर्ष का बुजुर्ग प्रेमी अपने प्रेमिका के बारे में कहता हैं ....
''मैं वही सोचता हूं जो 'वह' कहती है या जो मैं सोचता हूं वही 'वह' कहती है। बड़ी मीठी उलझन है। कई बार तो ऐसा लगता है मानो मैंने अपने ही शब्द उसके मुंह में डाल दिए हैं। कभी कभी हम एक दूसरे से गुस्सा होते है पर आंखों से बाते करते है।''
50 वर्ष की बुजुर्ग 'प्रेमिका' अपने प्रेमी के बारे में कहती है -
''हम हर काम का श्रेय एक-दूजे को देते हैं। हम एक-दूजे की छवि को बनाए रखने के लिए दीवानों की तरह काम करते हैं। जैसे 'इनके' नाम से मैं दूसरों को उपहार भेजती हूं और मेरी तरफ से 'ये' दूसरों से क्षमा मांग लिया करते हैं। वो कितना भी गुस्से में रहे एक बार मुझे अगर देख ले तो गुस्सा छोड़ देते है। "
आज के युवा वर्ग को इनसे सीख लेने की जरूरत है.....
एक के शुरू किए गए वाक्य को जब दूसरा पूरा करता है। दूर-दूर बैठकर भी दृष्टि ऐसी होती है जिसका अर्थ स्पष्ट करने की जरूरत नहीं होती।
या किसी भी मनोरंजन के विषय में उनके मनोभावों को व्याख्या की आवश्यकता नहीं पड़ती। तब यही प्यार वह वटवृक्ष होता है जिसकी छांव तले प्यार के नन्हे पौधे जीवन-रस पाते हैं। परिवार में प्यार के बने रहने की सबसे बड़ी वजह मुखिया दंपति के रिश्तों की प्रगाढ़ता होती है।
प्यार के इसी कोमल स्वरूप को सहेजे जाने की जरूरत है। जहां शब्द अनावश्यक हो जाए और भावनाएं बस आंखों ही आंखों में एक से दूजे तक पहुंच जाए।
एहसास की एक ऐसी भीगी बयार, जो एक-दूजे के पास ना रहने पर भी..... दोनों को आत्मा का गहरा संदेश दे जाए। जी हां, बस.. प्यार इसी को तो कहते हैं....
@tri....

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