शनिवार, 27 जून 2020

में आम आदमी हु चलते हुए (कविता)


सभी उलझनों से निपटते हुए,
अपनी इच्छाओं को भूनते हुए,
धूप,ठंड बारिशों से लड़ते हुए,
चल रहा हु में थोड़ा डरते हुए,
में आम आदमी हु चलते हुए।

फिक्र बहुत है कही गिर न जाऊ,
उलझने बहुत है कही टूट न जाऊ,
भीड़ बहुत है कही खो न जाऊ,
अपने परिवार के लिए ढलते हुए,
में आम आदमी हु चलते हुए।

दुनिया से लड़ते हुए ,
ईमानदारी से काम करते हुए,
खुशियों के ताने बाने बुनते हुए,
छोटे छोटे सपनो के साथ आगे बढ़ते हुए,
में आम आदमी हु चलते हुए।
@tri....

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