शादी का लडू..........
शादी के पाचवी वी सालगिराह पर राहुल ने पूजा के लिए बहुत से तौफे ले आया था। दोनों चाय की चुस्ती लेते लेते पहले की बातो को ताजा करने लगे। बातें करते-करते अचानक पूजा ने कहा कि- "मुझे तुमसे बहुत कुछ कहना होता है, लेकिन हमारे पास समय ही नहीं होता एक-दूसरे के लिए।"
"इसलिए मैं दो डायरियां ले आती हूं और हमारी जो भी शिकायत हो हम पूरा साल अपनी-अपनी डायरी में लिखेंगे। अगले साल इसी दिन हम एक-दूसरे की डायरी पढ़ेंगे ताकि हमें पता चल सके कि हमें एक-दूसरे की कौन-सी बातें नापसंद हैं ताकि उन्हें सुधारा जा सके।"
राहुल भी सहमत हो गया कि विचार तो अच्छा है।
डायरियां आ गईं और देखते ही देखते एक साल बीत गया। शादी की छटवी वीं सालगिरह पर दोनों फिर साथ बैठे। दोनों के पास अपनी-अपनी डायरियां थीं।
पहले राहुल ने पूजा की डायरी पढ़ना शुरू की।
उसमें कई शिकायतें थीं, जैसे- आज होटल में खाना खिलाने का वादा करके भी नहीं ले गए, आज फ़िल्म दिखाने को बोले थे नही ले गए। आज मेरे मायके वाले आए तो उनसे ढंग से बात नहीं की तुम्हारे परिवार के लोगो ने, आज बरसों बाद मेरे लिए साड़ी लाए भी तो पुराने डिजाइन की।
पूजा की शिकायतें सुनकर राहुल की आंखों में आंसू आ गए।
राहुल ने कहा- मुझे पता ही नहीं था मेरी गलतियों का, मैं ध्यान रखूँगा कि आगे से ये गलतियां न हों।
अब पूजा ने राहुल की डायरी खोली।
पहला पन्ना- कोरा,
दूसरा पन्ना- कोरा,
तीसरा पन्ना- कोरा।
पूरी डायरी ही खाली थी।
पूजा ने कहा-" क्या तुमने इस डायरी में कुछ भी नहीं लिखा।"
राहुल ने कहा- "मैंने सब कुछ अंतिम पेज पर लिख दिया है।"
उसमें लिखा था-" मैं तुमने जो मेरे और मेरे परिवार के लिए त्याग किए हैं और इतने सालों में जो असीमित प्रेम दिया है, उसके सामने मैं इस डायरी में लिख सकूं ऐसी कोई कमी मुझे तुममें दिखाई ही नहीं दी। ऐसा नहीं है कि तुममें कोई कमी नहीं है, लेकिन तुम्हारा प्रेम, तुम्हारा समर्पण, तुम्हारा त्याग उन सब कमियों से ऊपर है। मेरी अनगिनत भूलों के बाद भी तुमने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में छाया बनकर मेरा साथ निभाया है। अब अपनी ही छाया में कोई दोष कैसे दिखाई दे मुझे। "
अब रोने की बारी पूजा की थी। उसने राहुल के हाथ से अपनी डायरी लेकर दोनों डायरियां आग में जला दी और साथ में सारे गिले-शिकवे भी।
दोस्तो ये कहानी मेरे प्रिय मित्र की है। सबक सभी के लिए है। पति-पत्नी का रिश्ता आपसी समझ पर टिका होता है। उम्र के एक पड़ाव पर ये समझना जरूरी हो जाता है कि पति-पत्नी एक-दूसरे की कमियां ढूंढने की बजाए ये याद करें कि हमारे साथी ने हमारे लिए कितना त्याग किया है तो निश्चित ही पति-पत्नी का रिश्ता और मजबूत हो सकता है।
@tri....

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