शनिवार, 27 जून 2020

तुम याद आ जाती हो( कविता)


तुम याद आ जाती हो....


कभी कभी युही बैठे बैठे
तुम याद आ जाती हो।
खयालो और ख्वाबो में 
अंगड़ाई लेती हुई 
तुम्हारी सूरत नज़र आ जाती है।
कभी कभी तुम्हारे कदमो की आहट
मेरे कानों को सुकून दे जाती है।
तुम्हारे आंखों की गहराई
मुझे नसे में डुबो जाती है।
कभी कभी तुम्हारे लबों से सरकती
ओस की छोटी छोटी बूंदे
दिल को छू जाती है।
तुम्हारी खिलखिलाहट,
तुम्हारी बच्चो वाली हँसी..
कभी कभी नही हमेशा
याद आती है।
@tri....

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