Miss u Papa...
लड़ता था झगड़ता था मैं
फिर अपने आप मान जाते थे आप
कभी गुस्से में ज्यादा बोल जाता
तब समझाते थे आप ...
ईमानदारी का पाठ पढ़ाते थे आप
मेरी नादानी को भूल कर
अपनी किसे सुनाते थे आप
में बात नही करता था तब
खुद ही आकर मुझे सोता देख
मेरे पास बैठ आशु बहाते थे आप
तब न जाने क्यों में जाग कर भी नही जागा
मेरे गालो पर गिरे आशु को नही पहचाना
आज उस आशु की भी याद आती है पापा
आपका गुस्सा भी याद आता है
आपका प्यार भी याद आता है पापा।
@tri....

Right . Very nice feelings.
जवाब देंहटाएंPapa ke rahne se kabhi kisi bat ki kami nahi hoti thi . Ham sabse Amir feel karte the .
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