शनिवार, 27 जून 2020

ज़िन्दगी (कविता)


ज़िन्दगी.....

जब दर्द मीठा मीठा सा लगने लगे,
समझलो ज़िन्दगी तुम्हे रास आ गयी है।
जब यादों और खयालो में कोई आने लगे
समझलो ज़िन्दगी कुछ कहना चाहती है।
जब बारिश की रिम झिम बूंदे गिरने लगे
समझलो ज़िन्दगी कोई धुन सुना रही है।
जब मौसम पतझड़ से हरियाली में बदलने लगे
समझलो ज़िन्दगी तुम्हे बुला रही है।
@tri

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