रविवार, 13 दिसंबर 2020

मेरे सच्चे अल्फ़ाज़

 

जय जवान जय किसान
भले हो लाख बेईमान
न गिरने पाए आन बान शान
क्यो की मेरा देश है महान
वक़्त बदला, ट्रेन्ड भी बदला
दुनिया बदली ,देश भी बदला
पर न बदला इंसान
जो वक़्त बेवक़्त बेचे अपना ईमान
पर फिर भी मेरा देश है महान
धरा को चीर कर बीज बोता
मेहनत से अनाज उगाता
आभाओ से रोज है लड़ता
बूंद बूंद पानी को तरसता
कभी है जीता कभी है मरता
पर मिट्टी से कभी जुदा न होता
आज़ादी के पहले भी था रोता
आज़ादी के बाद भी है रोता
मेरे देश का गरीब किसान 
पर फिर भी मेरा देश है महान।
नेताओ का भाषण सुनता
उनके आश्वाशन सुनता
उम्मीदों की बगीया को 
महकाने के चक्कर मे
सपनो का मायाजाल है बुनता
तपता, जलता खुद को है भुनता
मेरे देश का आम इंसान
पर फिर भी मेरा देश है महान।
सीमा की रक्षा है करता
देश के लिए है जीता मरता
परिवार से सदा दूर ही रहता
वक़्त पड़ने पर पीछे न हटता
मेरे देश का वीर जवान
पर हम सब है इन बातों से अनजान
फिर भी मेरा देश है महान।
चाहे पढ़ लो गीता चाहे पढ़ लो कुरान
बाइबल हो या श्री आदि ग्रंथ महान
सभी ग्रंथो का सार एक है 
एक है सब मे ज्ञान
कर्म है दाता कर्म विधाता
कर्म से बनता व्यक्ति महान
कर्म से ही है मानवता की पहचान
तभी बढ़ेगा देश का शान
और बन जायेगा देश महान।
✍️tri..

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

बेटियां..( Pride of nation)

 

वक़्त बदलेगा समाज भी बदल जाएगा।
जिस दिन हर बेटी को उसका हक़ मिल जाएगा।
बेटी जन्म लेगी बाप जस्न मनाएगा।
उस दिन माँ का दिल खुशियों से भर जाएगा।
बेटी सपने बुनेगी बाप उसे रास्ता दिखाएगा।
माँ की ममता संग हर बाग खिलखिलाएगा।
उस दिन संस्कारो की बगिया में हर फूल मुस्कुराएगा।
जिस दिन से भाई -भाई होने का फर्ज निभाएगा।
उस दिन से रक्षा बंधन का वचन सफल हो जाएगा।
जिस दिन बाप अपनी बेटी को बेटी कह के बुलाएगा।
उस दिन बेटी को बेटी होने का हक़ मिल जाएगा।
जिस दिन से समाज दिल से बेटी को अपनाएगा।
उस दिन से बेटी बोझ है यह कलंक मिट जाएगा।
बेटी लक्ष्मी होती है घर की जब परिवार समझ जाएगा।
उस दिन बेटी को बेटी होने पर गर्व हो जाएगा।
जिस दिन से बेटी को बेटी,बहु को बहु , माँ को माँ
बहन को बहन और पत्नी को पत्नी ,
होने का सम्मान मिल जाएगा।
उस दिन से यह पुरुष प्रधान देश बदल जाएगा।
बेटी अभिमान है देश की बुनियाद है।
समाज का उत्थान है पिता की पहचान है।
जब पुरुष प्रधान समाज इस बात को समझ जाएगा।
उस दिन से हर बेटी का जीवन सवर जाएगा।
महिला संग पुरुष होगा जो प्रधान कहलाएगा।
शक्ति बिना शिव का कोई मतलब न रह जाएगा।
यह बात जब देश का हर वर्ग समझ जाएगा।
उस दिन से समाज बदलेगा यह देश भी बदल जाएगा।
@tri..

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

सब मोह माया है।

 

जग है माया खेल है जीवन
कब तक खुद को बचाएगा?
जैसा कर्म करेगा बन्दे
वैसा ही फल पायेगा।
थोड़ा थोड़ा लूट पाट कर
कितना माल बनाएगा।
अहंकार के महल में 
कब तक दीप जलाएगा!
सब है तेरा कहता है तू
कब तक यह कह पायेगा।
आज तेरा जो भी है बन्दे
कल किसी और का हो जाएगा।
क्या सोना है क्या चाँदी है
सब धरा रह जायेगा।
रिश्ते नाते झूठे बन्दे
एक दिन आँख दिखाएंगे।
अभी समझ न पाया गर तु
फिर कभी समझ न पायेगा।
खाली हाथ तू आया बन्दे
खाली हाथ ही जायेगा।
मिट्टी से बना है जीवन
सब मिट्टी में मिल जाएगा।
सादा जीवन उच्च विचार
तुझे अमर कर जाएगा।
@tri..

रविवार, 22 नवंबर 2020

क्या लिखूं .. सोच रहा हु

 

दिल के जज्बात लिखूं
या मन की व्यथा..
अधूरे अल्फ़ाज़ लिखूं
या पूरी कविता..
क्या लिखूं यह सोच रहा हूं
शब्दो की भीड में 
कही भावनाये दब न जाए
डर से सिमटे अल्फ़ाज़ 
कही खो न जाए..
दुख की बात लिखू
या सुख के गीत
क्या लिखूं यह सोच रहा हूं
सत्य का अहसास लिखू
या झूठ का बाजार
मातृभूमि की पीड़ा लिखू
या इंसान की इंसानियत
क्या लिखूं यह सोच रहा हु
आने वाले कल पर लिखू
या बीते पल पे लिखू
आंखों की भाषा लिखू
या शब्दो की परिभाषा
क्या लिखूं यह सोच रहा हु
लब से निकलते बोल लिखू
या दिल के एहसास
मन के अंधेरे कोने में
बस उजियारा आ जाए
ऐसा कुछ लिखू सोच रहा हु।
@tri..

शनिवार, 14 नवंबर 2020

कुछ न होकर भी खुश रहने का अंदाज़

 

घर से कुछ दूर सड़क के किनारे
बाजार की भीड़ में 
मिठाई के दुकान के पास
सिक्के गिनते हुए मैंने उसे देखा,
उसकी आँखों मे दीवाली के उत्साह को 
मैंने सिक्को की खनक में जीते हुए देखा,
चाहत उसकी भी रंग बिरंगे कपड़ो की 
पर अपनी फटे पुराने कपड़ो को
साफ करते हुए मैंने उसे देखा,
मासूम सी आंखों की नमी को
चेहरे की मुस्कुराहट के पीछे
छुपाते हुए मैंने उसे देखा,
बाजार की भीड़ में लड़के को अकेले 
खामोश एक कोने में खड़े
खुद के ग़मो को पीते हुए मैंने देखा,
जब मैं उसके नजदीक गया
और पूछा,"बेटा क्या चाहिए तुम्हे?
हल्की सी मुस्कुराहट के साथ
सिर हिलाकर 'ना' करते हुए मैंने उसे देखा,
कमाल की गरीबी 
और गजब का स्वाभिमान 
उस बच्चे में मैंने देखा,
इतनी छोटी सी उम्र में 
उसके अंदर 'ज़मीर' को पलते हुए मैंने देखा,
कुछ न होकर भी खुश रहने का अंदाज़
उस बच्चे की मुस्कुराती आंखों में मैंने देखा।
   @tri....      

गुरुवार, 12 नवंबर 2020

उम्मीदो की दीवाली


मिट्टी के दीये बनाने वाला 
आशा के दीये बनाता है,
कई सपने और उम्मीदो को
मिठ्ठी के दीये में सजाता है,
भरी दोपहरिया उम्मीदो संग
फटे पुराने कपड़े में ही
दीये बेचने निकल जाता है,
"दीये ले लो"
"मिट्टी के दीये ले लो"
बड़े प्यार से लोगो को बुलाता है,
ऐसे ही कई उम्मीदे 
कभी चौराहे ,कभी बाज़ारो में 
कभी चौखट पर दिख जाते है,
जरूरतों को पूरी करने के चक्कर में
खुद की दीवाली भूल जाते है,   
तो क्यो न इस बार की दीवाली
कुछ अलग अंदाज़ में मनाई जाए,
जहाँ तक हो सके दीये की रोशनी
उन तक पहुचाई जाए ,
जिनकी मेहनत से 
हमारे छोटे छोटे सपने पूरे होते है ,
जिनके आशीर्वाद से 
हर घर रोशन होते है,
क्यो न इन नन्हे उम्मीदो को 
हौसलो की उड़ान दी जाए,
इस दीवाली इनके ओठो पर 
थोड़ी ही सही मुस्कान दी जाए।
@tri....

शनिवार, 7 नवंबर 2020

काश तेरे जैसी ही दुनिया होती..

 

जितनी प्यारी तुम्हारी आंखे है 
काश उतनी ही प्यारी दुनिया होती।
आसमान जितने सपने होते 
उम्मीदों से ऊंची उड़ान होती ।
न गिरने का भय होता 
न उड़ने की चिंता ।
प्यारी सी दुनिया मे 
प्यारे प्यारे लोग होते।
तुम्हारी तरह मुस्कुराते 
तुम्हारी तरह ही बाते करते ।
बातो से घाव भर जाता 
दर्द में भी दिल मुस्कुराता।
पर सपनो की दुनिया की
हकीकत कुछ और है ।
सच की कीमत कम है
झूट का ही शोर है।
उम्मीदे मंदी में है 
सपनो का भाव कमजोर है।
काँटो से सजी है दुनिया
पर ऊची उड़ान का जोर है।
हर कोई हर किसी की टांग खीचता
मतलब के बादल घनघोर है।
सच और झूठ के चश्मे पहने
लोग कितने अनमोल है।
@tri....

सोमवार, 2 नवंबर 2020

ज़िन्दगी की दोहरी चाल..

 

ज़िन्दगी अक्सर दोहरी चाल चलती है
नाम भी देती है, बदनाम भी करती है
प्रसंशा भी देती है,निंदा भी करती है
सम्मान भी देती है ,अपमान भी करती है
ज़िन्दगी के इस दोहरी चाल में इंसान बुरा फसता है
ज्यादा पाने की लालच में खुद को खो बैठता है
अपने पैसे और ताकत पर घमंड करता है
उसी घमंड से ' मैं 'का जन्म होता है
'मैं ' से अहंकार की उत्पत्ति होती है
अहंकार आदमी को सत्य से दूर कर देता है
असत्य धीरे धीरे अपनो को दूर कर देता है
रिश्ते काँच के टुकड़ो की भांति बिखर जाते है
अंत मे पैसे और ताकत बस नाम के रह जाते है 
जिस्म मिट्टी की मिट्टी में मिल जाती है
कर्म अच्छा हो तो नाम कर जाती है 
कर्म बुरे हो तो बदनाम हो जाती है 
ज़िन्दगी है यारो जीना सीखा जाती है
कभी गीता कभी कुरान बन जाती है 
इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाती है।
फिर भी इंसान ज़िंदगी को समझ नही पाता है
ज़िंदगी के दोहरी चाल में अक्सर फस जाता है।
@tri....

बुधवार, 28 अक्टूबर 2020

विश्वास की उड़ान

 

कल की सोच में 
आज परेशान है क्यो?
हाथ की लकीरों को देख 
हैरान है क्यो ?
माना घोर अंधेरा है,
पर किस बात ने तुझे घेरा है?
भाग्य के भरोसे बैठा, 
तो अंधेरा न मिट पाएगा;
कर्म की पूजा कर 
भाग्य तेरा बदल जाएगा |
जो होना है वो होगा ही,
तेरे रोके न रुकेगा ,
जो तुझे मिलना है ,
वो जरूर तुझे मिलेगा।
तेरे कर्म का फल 
      कोई और न खाएगा |   
जैसा तू कर्म करेगा, 
वैसा ही फल पाएगा|
माना आज वक़्त बुरा है!
पर युही चला जाएगा|
आज पतझड़ का मौसम है 
कल हरियाली आएगा।
तेरे हौसले के आगे,
कुछ भी न टिक पाएगा |
हो कर मायूश 
खो रहा है धैर्य क्यो? 
आज कुछ नही है तू !
कल सूरज बन जाएगा |
तेरे विश्वास से..
हर कोना जगमगाएगा।
@tri....
                                    

गुरुवार, 22 अक्टूबर 2020

ज़िन्दगी सुन जरा..

 

मंजिल की तलाश में ज़िन्दगी बदलती गयी
वक़्त की रफ्तार में उम्र ढलती गयी
दिमाग ने सोचने का मौका ही न दिया
समय के साथ कभी समझौता न किया
चाहे तकनीक हो या काम का दबाव
आपसी संबंध हो या शिक्षा का क्षेत्र
भागती ज़िन्दगी ने हक्का बक्का कर दिया
मन की खिड़कियों को खोलने का वक़्त ही न दिया
जब भी जरूरत पड़ी मदद की
नजरे अपनो की तलाश करती रही
अपने भी वक़्त के साथ बदलते गए
रिश्ते झूट थे जो धीरे धीरे गलते गए
मन भयभीत था जो डरता रहा
उत्तर की तलाश में आवारा भटकता रहा
उत्तर तो भीतर ही निहित था
अंतर मन के किसी कोने में सुरक्षित था
जब मन को एकाग्र किया
खुद को देखने का प्रयास किया
तब दिल ने जवाब दिया
मंजिल की तलाश में क्यो भटक रहा है तू
कड़ी धूप में क्यो जल रहा है तू
रुक थोड़ा अए ज़िन्दगी आराम कर 
थक गया होगा थोड़ा विश्राम कर
मंजिले मिलेगी तुझे रास्तो पर ध्यान दे
खुशिया बिखरी है यहाँ तू उन्हें पहचान दे
माना सफलता के लिए मंजिले जरूरी है
पर मंजिल तक पहुचने के लिए जीना भी जरूरी है 
प्रकृति में खुशिया है खुल कर आनंद ले
कह रही है ज़िन्दगी सुन जरा तू ध्यान से
"मंजिलों की फिक्र में उम्र बर्बाद मत कर
रास्तो का लुत्फ़ उठा डर को मार कर।"
@tri....

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

कलियुग और इंसान


कलयुग को ईश्वर का वरदान है
सत्य निर्धन है तो झूठ धनवान है
धर्म कर्म की यहाँ दुकान है
दिखावे की बस पहचान है
मोती खाता कौवा अनजान है
दाना चुगता हंश हैरान है
जिसकी लाठी उसकी भैंस यही गुणगान है
पैसों से मिले प्रतिभा का सम्मान है 
कोई खरीदता कोई बेचता ईमान है
सब अपने अपने मे परेशान है
यहाँ तो कदम कदम पे बेईमान है
जो इंसानियत को कर रहे बदनाम है 
सच्चाई और इमानदारी तो सिर्फ नाम है
जो इस पर चल रहा उसका जीना हराम है
धर्म की राजनीति में आज घिरा हिन्दुस्तान है
सीमा पे तैनात कह रहा हर जवान है
@tri....

बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

कलाम तुझे सलाम

 

न हिन्दू थे न मुसलमान
थे हिन्दुस्तान की शान
बच्चो के थे दिल के तारे
युवाओं के आदर्श निराले
गरीबी में थे पले बड़े
ज़िद्द पे अपने रहे अड़े
कभी मुश्किलों से डरे नही
मिली चोट पर रुके नही
निरंतर किया उन्होंने अभ्यास 
कभी न हुए वे हताश
हिम्मत लगन उनके खून में था
साहस उनके अस्तित्व में था
आदर्श संस्कार माँ से मिला
ईमादारी का सबक पिता ने दिया
कर्तब्य पथ ने निडर बना दिया
सपनो ने जीना सीखा दिया 
सपने थे आसमान को पाने की
हौसला था इतिहास बनाने की
करते रहे प्रयास पर प्रयास 
बनाते गए मिसाइल ख़ास
परमाणु परीक्षण कर बने महान
देश को हुआ इनपर अभिमान 
देश ने दिया भारतरत्न का सम्मान
देश ने गाया गौरवगान
मिसाइल मैन तुझे प्रणाम
कलाम तुझे सलाम।
@tri....

सोमवार, 12 अक्टूबर 2020

आत्मनिर्भर फेरीवाले

 


कल अचानक सड़क का नजारा देखने लायक था
फेरीवाले अपने सामान समेटे यहाँ वहाँ भाग रहे थे
ऐसा लग रहा था मानो कोई तूफान आ रहा हो
वहाँ से गुजरने वाले लोग खड़े तमाशा देख रहे थे
अचानक सामने से एक बड़ी सी गाड़ी गुजरती है
सड़क के किनारे बाजार के बीच वह रुकती है
गाड़ी के रुकते ही कुछ लोग गुस्से में उतरते है
बाजार से भाग रहे फेरीवालों को पकड़ कर मारते है
सामान से भरे टोकरियों को छिन कर फेक देते है
उनके फल और सब्जियों को अपने गाड़ी में भरते है
और धमकी देते हुए  तेजी से वहाँ से निकल जाते है 
समझ नही आया कि फेरीवालों का अपराध क्या है
क्या बाजार में फल सब्जियां बेचना उनका अपराध है?
या आत्मनिर्भर बन रोजगार करना अपराध है?
जब एक फेरीवाले से मैंने पूछा कि ये लोग कौन थे 
क्यो आप लोगो की सब्जियां, फल ठेले सहित ले गए?
जवाब मिलते ही दिल और दिमाग शांत सा हो गया
फेरीवाले ने बड़े ही गुस्से में तिलमिलाकर जवाब दिया, 
"साहब बाजार में फेरीवालों को हफ्ता देना होता है
जो फेरीवाला हफ्ता नही देता उसका यही हाल होता है"
मैंने पूछा"वैसे ये हफ्ता किसके कहने पे लिया जाता है?

फेरीवाले के जवाब ने तो नेताओं की पोल ही खोल दी
जो कुछ मुझे नही पता था उसकी नम आंखों ने बोल दी
यारो सच हम सबको को पता है पर डर से कुछ बोलते नही
इंसान है पर बंदर की तरह गुलाटी मारना हम छोड़ते नही 
हर किसी के जुबान पर है आत्मनिर्भर बनो आत्मनिर्भर
आप खुद ही सोचिये कोई इस तरह कैसे बने आत्मनिर्भर?
@tri....