रविवार, 14 जून 2026

क्या चाहते हो..


क्या चाहते हो मुझसे
इम्मान को मार दु
बेईमान बन जाऊं,
और उसके बाद भी
चाहते हो तमीज़ से पेश आऊ।
जी हुजूरी करू तलवे चाटु,
अपनो को धोखा दु
लोगो के सर काटु
क्या चाहते हो मुझसे
झूठ पे झूठ बोलू,
सत्य की बलि चढ़ा दु
स्वाभिमान को बेच दु ,
खुद की नज़रों में खुद को गिरा दु
जो चाहते हो तुम
वो मैं कभी न कर पाऊंगा।
बढ़ी मेहनत से कमाया है जमीर,
जो कभी बेच न पाऊंगा।
ज़िंदा हु जब तक
कभी सर न झुकाउंगा।
मौत का सामना हुआ अगर
तो उससे भी लड़ जाऊंगा।
मिट्ठी से बना हु मैं
अंत मे मिट्ठी में मिल जाऊंगा।
पर जो चाहते हो तुम
वो कभी न कर पाऊंगा।
✍️tri..

मेरी आवाज सुनो।

नीद कहाँ से आएगी।

 

कोशिश करोगे मुस्कुराने की
पर सच वाली हँसी ओठो पर न आएगी।
झूठ का नकाब ओढ़े ज़िन्दगी
कभी न कभी तो डगमगायेगी।
खुशियों के पल खरीदोगे
तो उलझने भी साथ आएगी।
लोगो की बदुआये लोगे तो
रात में नींद कहाँ से आएगी।
सर दर्द से फटेगा रूह कपकपायेगी,
साँसे लोगे तो दिल की धड़कन बड़ जाएगी।
डर के कदमो की आहट
अक्सर वक़्त बेवक़्त सतायेगी।
चाहोगे दुनिया से आज़ाद होना
पर आज़ादी रास न आएगी।
सारी उलझनों से दूर शांति से
सोना चाहोगे पर नींद कहाँ से आएगी।
✍️त्रिभुवन शर्मा..

लड़ना तो है ही ।

 

प्रस्थितिया कैसी भी हो
समस्याए कितनी भी ताकतवर क्यो न हो
जितने के लिए लड़ना तो है ही
कोई साथ हो या ना हो
कोई उम्मीद हो या न हो
डट कर खड़ा रहना तो है ही
हिम्मत से लड़ना तो है ही।
मुकाबला चाहे एक दिन का हो या एक साल का
जंग में चाहे हार हो या जीत
इस बात को सोचे बिना
दुश्मन से दो दो हाथ करना तो है ही
निडर और साहसी हो कर लड़ता तो है ही।
कल की परवाह किये बिना
आने वाले कल के लिए
आज संघर्ष करना तो है ही
विश्वास के साथ लड़ना तो है ही।
मन भयबीत है क्या होगा पता नही
कौन साथ होगा कौन नही
पर जो आज साथ है
उन्हें साथ लेकर चलना तो है ही
जिनके लिए लड़ना तो है ही।
सूरज की रोशनी चाँद की चाँदनी संग
रोज बैठ कर बात करने की आदत है
इस आदत को ज़िंदा रखने के लिए
खुद को खुश रखना तो है ही
दुख कितना भी क्यो न हो लड़ना तो है ही।
एक अलग सोच के साथ
एक अलग उम्मीद के साथ
खुद की पहचान बनाते हुए
आगे बढ़ना तो है ही।
एक नई ऊर्जा के साथ लड़ना तो है ही।
✍️त्रिभुवन शर्मा

उम्मीदों की दीवाली ।