शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

मैं सूरज नही तो ना सही एक नन्हा दीया तो हूँ..

 

मैं सूरज नही तो ना सही
एक नन्हा दीया तो हूँ
मुझमे स्वयं जलने और
कुछ करने की शक्ति तो है,
क्या हुआ अगर मैं पूरे जग को
प्रकाशित नही कर सकता
पर रोशनी फैलाने की चाहत तो है,
कुछ करने की इच्छा
मेरे जीवन का उद्देश्य है
छोटा ही सही कुछ तो मुझमे विशेष है,
मेरा आत्मविश्वास अक्सर
मुझे प्रेरणा देता है,
अच्छा हो या बुरा  हो समय
एक दिन जरूर परिवर्तन होता है,
पाता है वही जग में मंजिल
जो कभी अपना आत्मविश्वास नही खोता है,
फिर चाहे एक नन्हे दीपक का प्रकाश हो
या एक विशाल से सूरज का तेज
यह सवाल तो बस सवाल ही रह जाता है,
सदियों से जग उसी को अपनाता है
जो अपनी राह खुद ही बनाता है।
✍️tri..

रविवार, 31 जनवरी 2021

अपना वक़्त खुद ही बना लो..

 


नशीब पर यकीन करने से अच्छा
मेहनत के आगे सर झुका दो
समस्याएं बहुत है ज़िन्दगी में
खुद को समाधान बना लो
वक़्त तुम्हें वक़्त न दे
तो अपना वक़्त खुद ही बना लो

तेज बारिश रस्ता रोके अगर
दिल को तुम चट्टान बना लो
दुश्मन रोके टोके अगर
हिम्मत को तूफान बना लो
वक़्त तुम्हें वक़्त न दे
तो अपना वक़्त खुद ही बना लो

दुनिया कहे पागल तो पागल ही सही
उन्हें अपने मेहनत का जादू दिखा दो
कही हौसले कम न पड़ जाए
खुद में सूरज सा जोश जगा लो
वक़्त तुम्हें वक़्त न दे
तो अपना वक़्त खुद ही बना लो

प्रकाशमय हो जाए जग सारा
चांद तारो का आसमान बना लो
खुद को बना लो इतना जिद्दी
की जो पाना है उसे तुम पा लो
वक़्त तुम्हें वक़्त न दे
तो अपना वक़्त खुद ही बना लो

दिमाग से ज्यादा दिल की सुनो
ईमानदारी से अपना रास्ता बना लो
कांटो की परवाह किये बिना
मंजिल की ओर कदम बढ़ा लो
वक़्त तुम्हें वक़्त न दे
तो अपना वक़्त खुद ही बना लो
✍️tri.. 

रविवार, 24 जनवरी 2021

प्यार में ये तो होता ही है..

 

तुम जब करीब आती हो
आंखों से मुस्कुराती हो
चुप चुप सी रहती हो
पलको से बोल जाती हो
गुस्सा कितना भी करो
मुझे देखते ही खिलखिलाती हो
मैं कही दूर न चला जाऊं
इस बात से डरती हो
मुझसे बाते न हो
तो खुद को परेशान करती हो
कभी चिढ़ती हो
तो कभी गुस्सा दिखाती हो
पल पल हर पल
मुझे विश्वास दिलाती हो
कितना प्यार करती हो
मुझे अहसास कराती हो
मेरी थोड़ी सी भी दूरी
तुम सह नही पाती हो
कभी sms तो कभी कॉल करके
मेरी खैरियत जताती हो
रात में सोने से लेकर
सुबह के जगने तक
मेरे ख्वाब बुनती हो
और मेरे ही सपने सजाती हो
कुछ भी करो कुछ भी कहो तुम
बिन मेरे तुम रह नही पाती हो।
✍️tri..  

बुधवार, 30 दिसंबर 2020

नया साल..

 

      लड़ते झगड़ते ,गिरते पड़ते        
कभी दुख में कभी सुख में
यादों की तिजोरी सजोये 
संभलते हुए आगे बढ़ गया
लो वक़्त के साथ साथ 
यह साल भी गुजर गया 
कई नींद में ही सो गए 
और जो जागे हुए थे..
वो ज़िन्दगी के भीड़ में खो गए
कई रिश्ते बिखरे कई सपने टूटे
कइयों के अपने भी रूठे
अपने अनजाने हो गए
अनजाने अपने हो गए
फिर भी ज़िन्दगी चलती रही
समय के साथ ढलती रही
               कभी आजमाती रही            
तो कभी बदलती रही
दिन महीने साल युही बीतता गया
उम्र का एक साल और चला गया
पर वक़्त का पहिया कभी नही रुका
फिर उम्मीदों के सपने बुनते हुए
आशाओ का सृंगार करते हुए
वक़्त के साथ साथ चलते हुए
हौसलो की उड़ान भरते हुए
कई चुनौतिया साथ लिए
पुराने साल को खुशी खुशी विदा कर
पूरे हर्ष उल्लाश के साथ
नए साल ने दस्तक दिया।
@tri..

रविवार, 20 दिसंबर 2020

रूठना और मनाना

 

मेरा रूठना और तेरा मुझको मनाना
दिल का टूटना फिर तुझसे ही दिल लगाना
बाते न करना और बाते बनाना
कुछ न बोल कर भी बहुत कुछ बोल जाना
आंखे मटकाना और ओठो से मुस्कुराना
खुद भी हँसना और मुझको भी हँसाना
इशारो इशारो में मुझको मनाना
कितना प्यार है मुझसे, ये अहसास कराना
कान पकड़ के उठक बैठक लगाना
फिर भी न मानु तो मेरे करीब आना
"सॉरी" कह के मेरे गले लग जाना
कितने भी झगड़े करना पर दूर न रह पाना
दो पल का गुस्सा पल भर में मिट जाना
यही तो प्यार है कभी रूठना कभी मनाना
आदत है प्यार की प्यार की आदत बन जाना।
          ✍️tri..        

रविवार, 13 दिसंबर 2020

मेरे सच्चे अल्फ़ाज़

 

जय जवान जय किसान
भले हो लाख बेईमान
न गिरने पाए आन बान शान
क्यो की मेरा देश है महान
वक़्त बदला, ट्रेन्ड भी बदला
दुनिया बदली ,देश भी बदला
पर न बदला इंसान
जो वक़्त बेवक़्त बेचे अपना ईमान
पर फिर भी मेरा देश है महान
धरा को चीर कर बीज बोता
मेहनत से अनाज उगाता
आभाओ से रोज है लड़ता
बूंद बूंद पानी को तरसता
कभी है जीता कभी है मरता
पर मिट्टी से कभी जुदा न होता
आज़ादी के पहले भी था रोता
आज़ादी के बाद भी है रोता
मेरे देश का गरीब किसान 
पर फिर भी मेरा देश है महान।
नेताओ का भाषण सुनता
उनके आश्वाशन सुनता
उम्मीदों की बगीया को 
महकाने के चक्कर मे
सपनो का मायाजाल है बुनता
तपता, जलता खुद को है भुनता
मेरे देश का आम इंसान
पर फिर भी मेरा देश है महान।
सीमा की रक्षा है करता
देश के लिए है जीता मरता
परिवार से सदा दूर ही रहता
वक़्त पड़ने पर पीछे न हटता
मेरे देश का वीर जवान
पर हम सब है इन बातों से अनजान
फिर भी मेरा देश है महान।
चाहे पढ़ लो गीता चाहे पढ़ लो कुरान
बाइबल हो या श्री आदि ग्रंथ महान
सभी ग्रंथो का सार एक है 
एक है सब मे ज्ञान
कर्म है दाता कर्म विधाता
कर्म से बनता व्यक्ति महान
कर्म से ही है मानवता की पहचान
तभी बढ़ेगा देश का शान
और बन जायेगा देश महान।
✍️tri..

गुरुवार, 3 दिसंबर 2020

बेटियां..( Pride of nation)

 

वक़्त बदलेगा समाज भी बदल जाएगा।
जिस दिन हर बेटी को उसका हक़ मिल जाएगा।
बेटी जन्म लेगी बाप जस्न मनाएगा।
उस दिन माँ का दिल खुशियों से भर जाएगा।
बेटी सपने बुनेगी बाप उसे रास्ता दिखाएगा।
माँ की ममता संग हर बाग खिलखिलाएगा।
उस दिन संस्कारो की बगिया में हर फूल मुस्कुराएगा।
जिस दिन से भाई -भाई होने का फर्ज निभाएगा।
उस दिन से रक्षा बंधन का वचन सफल हो जाएगा।
जिस दिन बाप अपनी बेटी को बेटी कह के बुलाएगा।
उस दिन बेटी को बेटी होने का हक़ मिल जाएगा।
जिस दिन से समाज दिल से बेटी को अपनाएगा।
उस दिन से बेटी बोझ है यह कलंक मिट जाएगा।
बेटी लक्ष्मी होती है घर की जब परिवार समझ जाएगा।
उस दिन बेटी को बेटी होने पर गर्व हो जाएगा।
जिस दिन से बेटी को बेटी,बहु को बहु , माँ को माँ
बहन को बहन और पत्नी को पत्नी ,
होने का सम्मान मिल जाएगा।
उस दिन से यह पुरुष प्रधान देश बदल जाएगा।
बेटी अभिमान है देश की बुनियाद है।
समाज का उत्थान है पिता की पहचान है।
जब पुरुष प्रधान समाज इस बात को समझ जाएगा।
उस दिन से हर बेटी का जीवन सवर जाएगा।
महिला संग पुरुष होगा जो प्रधान कहलाएगा।
शक्ति बिना शिव का कोई मतलब न रह जाएगा।
यह बात जब देश का हर वर्ग समझ जाएगा।
उस दिन से समाज बदलेगा यह देश भी बदल जाएगा।
@tri..

शुक्रवार, 27 नवंबर 2020

सब मोह माया है।

 

जग है माया खेल है जीवन
कब तक खुद को बचाएगा?
जैसा कर्म करेगा बन्दे
वैसा ही फल पायेगा।
थोड़ा थोड़ा लूट पाट कर
कितना माल बनाएगा।
अहंकार के महल में 
कब तक दीप जलाएगा!
सब है तेरा कहता है तू
कब तक यह कह पायेगा।
आज तेरा जो भी है बन्दे
कल किसी और का हो जाएगा।
क्या सोना है क्या चाँदी है
सब धरा रह जायेगा।
रिश्ते नाते झूठे बन्दे
एक दिन आँख दिखाएंगे।
अभी समझ न पाया गर तु
फिर कभी समझ न पायेगा।
खाली हाथ तू आया बन्दे
खाली हाथ ही जायेगा।
मिट्टी से बना है जीवन
सब मिट्टी में मिल जाएगा।
सादा जीवन उच्च विचार
तुझे अमर कर जाएगा।
@tri..

रविवार, 22 नवंबर 2020

क्या लिखूं .. सोच रहा हु

 

दिल के जज्बात लिखूं
या मन की व्यथा..
अधूरे अल्फ़ाज़ लिखूं
या पूरी कविता..
क्या लिखूं यह सोच रहा हूं
शब्दो की भीड में 
कही भावनाये दब न जाए
डर से सिमटे अल्फ़ाज़ 
कही खो न जाए..
दुख की बात लिखू
या सुख के गीत
क्या लिखूं यह सोच रहा हूं
सत्य का अहसास लिखू
या झूठ का बाजार
मातृभूमि की पीड़ा लिखू
या इंसान की इंसानियत
क्या लिखूं यह सोच रहा हु
आने वाले कल पर लिखू
या बीते पल पे लिखू
आंखों की भाषा लिखू
या शब्दो की परिभाषा
क्या लिखूं यह सोच रहा हु
लब से निकलते बोल लिखू
या दिल के एहसास
मन के अंधेरे कोने में
बस उजियारा आ जाए
ऐसा कुछ लिखू सोच रहा हु।
@tri..

शनिवार, 14 नवंबर 2020

कुछ न होकर भी खुश रहने का अंदाज़

 

घर से कुछ दूर सड़क के किनारे
बाजार की भीड़ में 
मिठाई के दुकान के पास
सिक्के गिनते हुए मैंने उसे देखा,
उसकी आँखों मे दीवाली के उत्साह को 
मैंने सिक्को की खनक में जीते हुए देखा,
चाहत उसकी भी रंग बिरंगे कपड़ो की 
पर अपनी फटे पुराने कपड़ो को
साफ करते हुए मैंने उसे देखा,
मासूम सी आंखों की नमी को
चेहरे की मुस्कुराहट के पीछे
छुपाते हुए मैंने उसे देखा,
बाजार की भीड़ में लड़के को अकेले 
खामोश एक कोने में खड़े
खुद के ग़मो को पीते हुए मैंने देखा,
जब मैं उसके नजदीक गया
और पूछा,"बेटा क्या चाहिए तुम्हे?
हल्की सी मुस्कुराहट के साथ
सिर हिलाकर 'ना' करते हुए मैंने उसे देखा,
कमाल की गरीबी 
और गजब का स्वाभिमान 
उस बच्चे में मैंने देखा,
इतनी छोटी सी उम्र में 
उसके अंदर 'ज़मीर' को पलते हुए मैंने देखा,
कुछ न होकर भी खुश रहने का अंदाज़
उस बच्चे की मुस्कुराती आंखों में मैंने देखा।
   @tri....      

गुरुवार, 12 नवंबर 2020

उम्मीदो की दीवाली


मिट्टी के दीये बनाने वाला 
आशा के दीये बनाता है,
कई सपने और उम्मीदो को
मिठ्ठी के दीये में सजाता है,
भरी दोपहरिया उम्मीदो संग
फटे पुराने कपड़े में ही
दीये बेचने निकल जाता है,
"दीये ले लो"
"मिट्टी के दीये ले लो"
बड़े प्यार से लोगो को बुलाता है,
ऐसे ही कई उम्मीदे 
कभी चौराहे ,कभी बाज़ारो में 
कभी चौखट पर दिख जाते है,
जरूरतों को पूरी करने के चक्कर में
खुद की दीवाली भूल जाते है,   
तो क्यो न इस बार की दीवाली
कुछ अलग अंदाज़ में मनाई जाए,
जहाँ तक हो सके दीये की रोशनी
उन तक पहुचाई जाए ,
जिनकी मेहनत से 
हमारे छोटे छोटे सपने पूरे होते है ,
जिनके आशीर्वाद से 
हर घर रोशन होते है,
क्यो न इन नन्हे उम्मीदो को 
हौसलो की उड़ान दी जाए,
इस दीवाली इनके ओठो पर 
थोड़ी ही सही मुस्कान दी जाए।
@tri....

शनिवार, 7 नवंबर 2020

काश तेरे जैसी ही दुनिया होती..

 

जितनी प्यारी तुम्हारी आंखे है 
काश उतनी ही प्यारी दुनिया होती।
आसमान जितने सपने होते 
उम्मीदों से ऊंची उड़ान होती ।
न गिरने का भय होता 
न उड़ने की चिंता ।
प्यारी सी दुनिया मे 
प्यारे प्यारे लोग होते।
तुम्हारी तरह मुस्कुराते 
तुम्हारी तरह ही बाते करते ।
बातो से घाव भर जाता 
दर्द में भी दिल मुस्कुराता।
पर सपनो की दुनिया की
हकीकत कुछ और है ।
सच की कीमत कम है
झूट का ही शोर है।
उम्मीदे मंदी में है 
सपनो का भाव कमजोर है।
काँटो से सजी है दुनिया
पर ऊची उड़ान का जोर है।
हर कोई हर किसी की टांग खीचता
मतलब के बादल घनघोर है।
सच और झूठ के चश्मे पहने
लोग कितने अनमोल है।
@tri....

सोमवार, 2 नवंबर 2020

ज़िन्दगी की दोहरी चाल..

 

ज़िन्दगी अक्सर दोहरी चाल चलती है
नाम भी देती है, बदनाम भी करती है
प्रसंशा भी देती है,निंदा भी करती है
सम्मान भी देती है ,अपमान भी करती है
ज़िन्दगी के इस दोहरी चाल में इंसान बुरा फसता है
ज्यादा पाने की लालच में खुद को खो बैठता है
अपने पैसे और ताकत पर घमंड करता है
उसी घमंड से ' मैं 'का जन्म होता है
'मैं ' से अहंकार की उत्पत्ति होती है
अहंकार आदमी को सत्य से दूर कर देता है
असत्य धीरे धीरे अपनो को दूर कर देता है
रिश्ते काँच के टुकड़ो की भांति बिखर जाते है
अंत मे पैसे और ताकत बस नाम के रह जाते है 
जिस्म मिट्टी की मिट्टी में मिल जाती है
कर्म अच्छा हो तो नाम कर जाती है 
कर्म बुरे हो तो बदनाम हो जाती है 
ज़िन्दगी है यारो जीना सीखा जाती है
कभी गीता कभी कुरान बन जाती है 
इंसान को इंसानियत का पाठ पढ़ाती है।
फिर भी इंसान ज़िंदगी को समझ नही पाता है
ज़िंदगी के दोहरी चाल में अक्सर फस जाता है।
@tri....