बुधवार, 23 जून 2021

भागना गलत-मनाना सही।( कहानी )

 

कहानी का नाम सुनकर आप लोगों को थोड़ा अजीब लग रहा होगा पर दोस्तों कहानी पढ़ने के बाद आप को लगेगा कि यही नाम इस कहानी के लिए उचित था। तो बिना देर किए कहानी की शुरुवात करते है।


      एक बस के बीच की सीट पर बैठा एक युवा जोड़ा बहुत देर से आपस में बात कर रहा था । मैं ठीक उनके पीछे ही बैठा था। अचानक उन्होंने मुझसे पूछा, "क्या ये बस पनवेल जाएगी ?"  मैंने भी 'हाँ' में जवाब दिया और चुप चाप उनकी बातें सुनने लगा। उनकी बातों से लग रहा था वो काफी समय से एक दूसरे के साथ है। एक दूसरे को जानते है ।                 

इतना ही नहीं उनकी बातों से ये भी लग रहा था वो एक दूसरे से बेहद प्यार भी करते है। लड़की लड़के से भावनात्मक स्वर में बोले जा रही थी कि वो उसके बिना नहीं रह सकती। कहीं उसके माता पिता उसे अलग न कर दे। उसकी शादी कहीं और न कर दे उसके पहले मुझे भगा ले जाओ।
लड़का समझदारी से उसे समझा रहा था की भागना सही नहीं है सिर्फ अपने खुशी के लिए हमे अपने लोगों का दिल नहीं तोड़ना चाहिए।
"क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करते ? क्या तुम नहीं चाहते हम साथ रहे ? या तो तुम भागने से डर रहे हो !," लड़की ने जवाब दिया। लड़के ने बहुत ही नम्र भाव से उत्तर दिया, " भागने से डर नहीं रहा हुँ,
भागने के बाद तुम्हारे अपनो की ज़िंदगी पूरी तरह
से पलट जाएगी । तुम्हारे माता पिता की क्या हालत होगी वो सोच रहा हुँ।"

लड़की जवाब में कहती है, " तो क्या लड़कियों से नहीं पूछी जानी चाहिए उनकी मर्जी ? क्या हमारी पसंद-नापसंद का कोई मोल नहीं।
"ऐसा नहीं है " लड़का बोलता है।

लड़की कहती है, "ऐसा नहीं तो क्या है? हम लड़कियों को कचरा समझ कर या बोझ समझ कर किसी के भी गले मढ़ दिया जाता है । ज़िन्दगी तो हमे बितानी है तो हमारी भी राय लीजिए।" 
                             
लड़का उसके सिर पर हाथ रख कर धीरे से थपकी मारते हुए बोलता है,"पागल, इतना सब क्यों गलत सोच रही हो, माता-पिता को हमारी फिक्र है इसलिए वो हमारे बारे में सोचते है । पर मैं तुम्हारी इस बात से सहमत हूँ कि उन्हें अपने बच्चों से उनकी राय, उनकी पसंद-नापसंद पूछनी चाहिए जो बहुत जरूरी है,अगर ऐसा हो जाए तो प्यार करने वाली जोड़ियाँ भागे ही क्यों।"  "अब समझे न मेरी बात ! लड़कियों को लगता है बिना खुद की पसंद   के जबरदस्ती शादी करके ज़िन्दगी भर एडजस्ट ही करना है और फिर अपने माँ-बाप को कोसना है उससे अच्छा खुद की पसंद से भाग के
शादी करना ठीक है ताकि आगे हम किसी को
कोसेंगे तो नहीं । ", लड़की ने कहा।

"पर एक बात मेरी सुनोगे ? अच्छी तरह सुनना। " लड़का प्यार से बोलता है। "क्यों नही सुनूँगी , तुम बोलो ।" लड़की जल्दी में जवाब देती है। लड़का समझाते हुए बोलता है, " भागना गलत होता है,  मनाना सही है। भागने वाले जोड़े में लड़के की इज्ज़त पर कोई फर्क नही पड़ता, जबकि लड़की पूरी तरह से बदनाम हो जाती है। भगाने वाला लड़का उसके दोस्तों की नज़रों में हीरो बन जाता है। भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी तब भी जवानी में लिए उस
एक कदम का कलंक उसके और परिवार के माथे पर से नहीं मिटता। मानता हूँ कि लड़का लड़की
को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन हमारे समाज में है तो यही , ये नज़रिया गलत है,
मगर सामाजिक नज़रिया यही है। मैं चाहता हुँ ऐसा कोई काम न करूँ जिससे तुम्हें कोई बुरा बोले या तुम्हारे माता पिता को लगे कि बेटी ने बदनाम कर दिया। मैं इज्ज़त से तुम्हे ले जाऊँगा ताकि तुम्हारा और तुम्हारे माता-पिता का सम्मान बना रहे पर ले जाऊँगा जरूर। लड़की लड़के की बात सुन गर्व से उसके गले लग गई। उसके जुबान से बस एक ही वाक्य निकलता है "हम मनाएँगे अपने माता पिता को।"

दोनों की बात सुन इस बात का अहसास जरूर हुआ,की हमे कभी भी हार नही माननी चाहिए।जितना हो सके सभी को प्यार से मनाने की कोशिश करना चाहिए। समस्याए है तो बात कर के उसका समाधान निकालना चाहिए और समाधान ऐसा हो जिससे न ही किसी का दिल टूटे और न ही कोई अपना हमसे रूठे।

तो दोस्तो कैसी लगी कहानी,काश इस कहानी की तरह अगर हर युवा जोड़ी की सोच ऐसी ही अच्छी और सच्ची हो जाये तो माँ बाप का सम्मान तो बढ़ेगा ही साथ में माँ बाप को अपने बच्चों की सोच पर गर्व भी महसूस होगा।
                                   ✍️त्रिभुवन शर्मा 

ना समझ..

 

जब उसने कहा तुम्हे पता है ना,
मुझे मेच्योर लोग पसंद है
तब समझ नही आया ये नया क्या है?
शायद मेच्योर अच्छे और परिपक्व होते होंगे
या उनके बात करने का तरीका अलग होगा।
या फिर सोच समझ कर इज्जत से बात करते होंगे
शायद उनका ड्रेसिंग स्टायल सबसे अलग होगा ।
मैंने कहाँ "क्यो तुम्हारा पार्टनर मेच्योर नही?"
उसने जवाब दिया ऐसा नही "वो मेच्योर  है
पर मुझे मेच्योर और अंडरस्टैंडिंग लोग पसंद है।"
थोड़ा अजीब लगा कि बंदा कहना क्या चाहता है
फिर उसने कहाँ" मुझे वो लोग पसंद है
जिनसे बात करके मैं फ्रेश हो जाती हु।"
उसकी बात सुन थोड़ा अजीब लगा,
मैंने जवाब दिया "क्यो तुम तुम्हारे अपनो से
बात करके फ्रेश महसूस नही करती।"
उसने कहाँ "अपने मेच्योर तो है
पर मुझे कोई समझता नही
मेरे दोस्त मुझे अच्छी तरह समझते है
क्यो की वो मेच्योर और अंडरस्टैंडिंग है।"
थोड़ी हँसी आयी सामने वाले पर
जो मेच्योर की बात किये जा रहा था।
शायद उसे यह नही पता था कि
जो हमारे अपने है वो 'अंडरस्टैंडिंग 'है
अगर नही होते तो क्या वो हमारे साथ होते
हमारी गलतियों को माफ करते।
जो हमारे अपने है वो 'मेच्योर' भी है
अगर नही होते तो क्या वो हमारी फिक्र करते हुए हमारे इंतज़ार में रात भर जगते।
शायद अपनो को समझने के लिए
वो लड़की ही मेच्योर नही थी।
नही तो जितना वो दोस्तो को महत्व दे रही थी उतना ही अपने अपनो को भी महत्व देती।
मुझे लगा सामने वाले को समझाना मुश्किल है,
इसलिए जाते जाते उसे एक सबक दे गया
की यार दोस्त भले तुम्हारे आस पास है
पर बदलते मौसम की तरह बदलते रहेंगे
अपने हमेशा अपने है जो तुम्हारे साथ चलेंगे।
✍️त्रिभुवन शर्मा

शनिवार, 22 मई 2021

बहुत अच्छा किया किनारा कर के।

 

बदनाम कर दिया हमारी मोहब्बत को
खराब किस्मत का इशारा कर के।
रस्ते रस्ते मंजिल मंजिल भटकता रहा
दर्द क्या खूब दिया सहारा बन के।
कोई कसूर न था मेरी चाहत में
न कोई कमी ही थी जज्बातों में
दिल टूटा बस टूटता ही गया
कमियों का बहाना कर के।
न कभी उसे अहसास हुआ
न कभी मुड़ के देखा कही
न कभी समझा मेरे प्यार को
चला गया वो बेसहारा कर के।
दो लफ़्ज़ों में सिमट गयी ज़िन्दगी
हमने उसे टूट का चाहा
और हम चाह कर टूट गये
साथ रहने का इरादा कर के ।
कसूर बस इतना था दिल का
बेइंतिहा प्यार किया उसे अपना समझ के।
पर छोड़ गया अकेला कमबख्त
बस झूठा वादा करके ।
तकलीफ हुई तड़पे भी बहुत
रोना चाहा पर रो न सके
फिर से उठने का इरादा करके।
हम काबिल थे हर जख्म सहने को
पर तुम काबिल न थे हमारी वफ़ा के लिए
इसलिए बहुत अच्छा किया हमसे किनारा कर के।
✍️त्रिभुवन शर्मा

मंगलवार, 11 मई 2021

कोरोना योद्धाओ को सलाम।

 

आंखे इनकी अक्सर हो जाती है नम
पर इनके हौसले कभी नही होते कम।
इनमे कोई कभी थकता नही
इनमे कोई कभी रुकता नही ।
निडर है साहसी है लक्ष्य एक है इनका
नामुमकिन को मुमकिन करने का जज्बा है इनका।
इनके लिए रात हो या दिन सब एक है
इनका मकसद मानव सेवा जो बहुत ही नेक है।
अपने घर और परिवार से दूर है ये लोग
पर अपने कर्तव्यों पर डटे है ये लोग।
अपनी परवाह किये बिना अपने दम पर अड़े है
मुश्किल के इस वक़्त में जो हमारे साथ खड़े है।
भूखे प्यासे जो आज इतिहास बनाने में लगे है
मौत से रोज आंखे मिलाते ये किसी के तो सगे है।
अनजान है ये योद्धा हमारे लिए
पर किसी न किसी रिश्ते में ये भी तो बंधे है।
ये है किसी के भाई,किसी की बहन है,
किसी के पति,तो किसी की पत्नी है।
ये है पिता किसी के,किसी की माँ है,
किसी के प्रेमी, तो किसी की प्रेमिका है।
ये ऐसे योद्धा है जिनके लिए संघर्ष अविराम है
जीवन इनका प्रेरणा स्रोत है इनके अखंडित जज्बे को दिल से सलाह है।

✍️त्रिभुवन शर्मा..



शनिवार, 1 मई 2021

दहेज लेना और देना एक गंभीर बीमारी है।

 

लड़की की शादी करो पर लड़की को बेंचो मत
ज्यादा दहेज देकर उसको कही फेको मत
लडकिया कचरा नही है dusbin में डालो मत।
लडकिया है लड़का नही ये समझ कर
अपना गुस्सा इन पर निकालो मत।
न सोचो लड़का बुढ़ापे का सहारा बनेगा
क्या पता बढ़ा हुआ तो सबसे किनारा करेगा।
लड़किया बोझ नही हमारी जिम्मेदारी है।
सहती सब कुछ बोलती नही
यह उनकी खुद्दारी है।
वक़्त के साथ चलो हर लड़की का सम्मान करो
लक्ष्मी है घर की इन पर अभिमान करो।
दहेज लेना और देना एक गंभीर बीमारी है
दहेज लेने वाला समाज का सबसे बड़ा भिखारी है।
दहेज वही लेगा जिसमे सामर्थ नही होगा
सीधी सी बात है वह मर्द नही होगा।
✍️त्रिभुवन शर्मा..

बुधवार, 28 अप्रैल 2021

मुम्बई तू बहुत खास है।

 

उदास न होना मुम्बई तू बहुत खास है
मुश्किले है तो क्या हुआ,
यही तो जीत की सुरुवात है।
देश की आर्थिक राजधानी तू
छत्रपति शिवाजी महाराज का ताज है।
मुम्बा आई कि मायानगरी मुम्बई
हज़ारो लाखो सपनो की आस है।
तेरे सर जमी पर बाबुल नाथ है
जहाँ भोले बाबा का वास है।
मुम्बई के महाराजा सिद्धिविनायक है
जिनका तुझ पर आशीर्वाद है।
धन दौलत और रौनक कभी कम न होगा
जहाँ महालक्ष्मी खुद ही बिराजमान है।
तेरी रखवाली में है खड़ा समुन्द्र
उसी समुन्दर में हाज़िअली का दरबार है।
वन जीयो से सजी यह धरती
पहाड़ो वाली माँ जीवदानी का धाम है।
तो क्यो मायूश होती है मुम्बई
जब तेरे सर पर इतनी दुवाओ का हाथ है।
समय कैसा भी हो अच्छा या बुरा
मुम्बईकर हमेशा तेरे साथ है।
उदास न होना मुम्बई तू बहुत खास है
✍️त्रिभुवन शर्मा..

सोमवार, 26 अप्रैल 2021

सही मौका है आजमालो अपनो को..

 

सही मौका है परख लो अपने खास रिश्तेदारों को,
अपने बॉस को अपने दोस्तों और यारो को।
ये लोग कहते थे हम एक परिवार है
दुख हो या सुख हम हमेशा तैयार है।
सही वक़्त है मदद मांग कर देख लो
अपना कौन पराया कौन पहचान कर देख लो।
अपना होगा तो आपके कॉल का रिस्पांस देगा,
पराया होगा तो आपके कॉल को इग्नोर करेगा।
अपना होगा तो साथ देने का वादा करेगा ,
पराया होगा तो हर रोज बस बहाना करेगा।
जो मदद करना चाहेगा वो फिक्र में कॉल करेगा ,
जो मदद नही करना चाहेगा वो सीधा ब्लॉक करेगा।
वक़्त यही है प्यारे लोगो को आजमाने का,
कौन तेरे साथ है इसका पता लगाने का।
✍️त्रिभुवन शर्मा..

शनिवार, 24 अप्रैल 2021

अब कुछ नज़र नही आता..

 

फितरत है झूठी प्रशासन की
कोई सूरत अब नज़र नही आती।
सच्चाई से रूबरू हो रही जनता
अब कोई मूरत नज़र नही आती।
तांडव है मौत का जल रही है चिताए शमशान में
बचने की कोई सीरत नज़र नही आती।
मातम का माहौल और डर है कोने कोने में
अब तो निकलने की कोई तरकीब
नज़र नही आती।
इंसान कैद है घरों में लग गए मंदिर में ताले
हालात इतनी बुरी की भगवान नज़र नही आते।
हाल बुरा है सबका अये हाले दिल-अये हाले वतन
अब तो भाग्य की लकीर भी नज़र नही आती।
भेड़ियों की खाल पहने कहा छुप गए वो भेड़
अब तो वो भाड़े की भीड़ भी नज़र नही आती।
कहाँ गए वो लोग जो दे रहे थे भीख ज़िन्दगी की
करते थे बाते विकास और सुरक्षा की,
कहाँ गए वो देवता जो दे रहे थे
सीख आत्मनिर्भरता की,
अब तो हालात ऐसी है कि
रक्षा की बात करने वाले रक्षक भी नज़र नही आते।
सब खेल है राजनीति का हमने यह बात जाना
शायद Population control करना होगा
यही हकीकत माना।
विनती है जनता से खुद की सुरक्षा खुद करे
मास्क पहने ठीक से और सेनेटाइजर use करे।
अब न संभले यारो तो कभी संभल न पाओगे
प्रशासन के भरोसे बैठे तो शमशान में
नज़र आओगे।

मंगलवार, 20 अप्रैल 2021

कोरोना का कहर।

 

जब कोरोना थोड़ा बड़ा
तो देश मे lockdown लगा।
थाली बजा,मोमबत्ती जला
रामायण और महाभारत का
एपिसोड भी चला।
जब कोरोना थोड़ा कम हुआ
तो देश मे unlockdown लगा।
बाजार खुला,हर मॉल खुला
धीरे धीरे संसार खुला।
बेफिक्र बेपरवाह हम सब हुए
आत्मनिर्भर के रंग में देश फिर रंगा।
जब कोरोना धीरे धीरे तेजी से बड़ा
तब देश मे फिर lockdown लगा।
अफरातफरी में मजदूर घर लौट पड़ा
नेताजी के भाषण का फिर दौर चला
परिस्थितिया काबू में है कोरोना कंट्रोल में
यह कहा गया और आईपीएल मैच चला।
स्कूल बंद हुए कॉलेज बंद हुए
रद्द हुआ परीक्षाओ का सफर
ताले लग गए दुकानों में
बंद हो गए मंदिर,मस्जिद, गिरजाघर
बोलने वाले बोलते रहे
पर कम न हुआ कोरोना का कहर
खोखली हो गयी रक्षा कवच
न दिखा वैक्सीन का असर
कोरोना मुह बाये पसरता रहा।
इंसान अस्पताल में बेड के लिए तरसता रहा।
मरीज ऑक्सीजन के बिना मरता रहा।
हज़ारो की तादाद में चिताए जलती रही
पर देश मे चुनाव और कुंभ चलता रहा।
✍️त्रिभुवन शर्मा..

रविवार, 28 मार्च 2021

कोरोना संग होली ।

 

होली है रंगों का त्योहार
हर कोई करता है इसका इंतजार
रंगों से सजने को हम है तैयार
मृदंग के स्वर में झूमने को है बेकरार
पर इस बार की होली होगी बेरंग
न उड़ेगा गुलाल न ही कोई रंग
न सजेगी टोली न रचेगी रंगोली
कोरोना के साये में मनेगी होली
बेफिक्र बिंदास इस बार न होना
नही तो पड़ जाएगा तुमको रोना
खेलो होली अपनो के संग
कही कोरोना कर न दे रंग में भंग
इसने किया है पूरी दुनिया को तंग
अभी भी जारी है इससे जंग
रहे सतर्क रखे ध्यान
तब ही होगा सबका कल्यान
पहने मास्क ,रखे दूरी
न बनने दे कोरोना को मजबूरी
होली है तो खेलो होली
सजा के रखो शब्दो की टोली
जम के मारो संदेशो की पिचकारी
रंग दो दुनिया सकारत्मकता से सारी।
✍️tri..

मंगलवार, 23 फ़रवरी 2021

क्या यही प्यार है

 

सुबह उठते ही
मेरी आँखें ढूढ़ती है तुम्हे
देखने की ज़िद करती है
करीब तो हो ही
और करीब होने की
ज़िद करती है
सूरज की रोशनी
जब मेरे चेहरे पर पड़ती है
मेरी आँखें छूती है
तुम्हे पाने की ज़िद करती है
जब चाय की चुस्की लेता हूं
चाय के कप से बाहर निकलती
अंगड़ाई लेती हुई
भाप में मुस्कुराती
मेरी आँखें तुम्हारी तस्वीर बुनती है
तुम्हे देखने की ज़िद करती है।
✍️tri..

रविवार, 14 फ़रवरी 2021

प्यार सच्चा हो तो..

 

ख़्वाईसे रंग लाती है
सपने दिल को सजाती है
प्यार सच्चा हो तो
कायनात भी दिल को दिल से
मिलाती है।
हवाएं अफ़साने लिखती है
बारिश की बूंदे उसे मिटाती है
प्यार सच्चा हो तो
तूफान हो या बाढ़ दिल की कश्ती
किनारे लग ही जाती है।
वक़्त हालात बया करती है
समस्याएं आंखे दिखाती है
प्यार सच्चा हो तो
काटो के बीच भी
दिल की बगिया खिल ही जाती है।
✍️tri..

शनिवार, 6 फ़रवरी 2021

मैं सूरज नही तो ना सही एक नन्हा दीया तो हूँ..

 

मैं सूरज नही तो ना सही
एक नन्हा दीया तो हूँ
मुझमे स्वयं जलने और
कुछ करने की शक्ति तो है,
क्या हुआ अगर मैं पूरे जग को
प्रकाशित नही कर सकता
पर रोशनी फैलाने की चाहत तो है,
कुछ करने की इच्छा
मेरे जीवन का उद्देश्य है
छोटा ही सही कुछ तो मुझमे विशेष है,
मेरा आत्मविश्वास अक्सर
मुझे प्रेरणा देता है,
अच्छा हो या बुरा  हो समय
एक दिन जरूर परिवर्तन होता है,
पाता है वही जग में मंजिल
जो कभी अपना आत्मविश्वास नही खोता है,
फिर चाहे एक नन्हे दीपक का प्रकाश हो
या एक विशाल से सूरज का तेज
यह सवाल तो बस सवाल ही रह जाता है,
सदियों से जग उसी को अपनाता है
जो अपनी राह खुद ही बनाता है।
✍️tri..